भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं। जब भी दुनिया की राजनीति में उतार-चढ़ाव आया, दोनों देशों ने एक-दूसरे का साथ निभाया है। इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर खुद उनका स्वागत किया, जो इस यात्रा की अहमियत को और बढ़ा देता है।
यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग को अगले स्तर तक ले जाने का अवसर है। दुनिया बदल रही है, भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, ऐसे में भारत और रूस की नजदीकियां कई मायने रखती हैं।
आइए ह्यूमन-फ्रेंडली अंदाज़ में समझते हैं कि पुतिन के इस दौरे से भारत को क्या फायदे होंगे, दोनों देशों के रिश्तों में क्या नई दिशा मिलेगी और वैश्विक पटल पर इसका क्या असर पड़ेगा।
⭐ 1. पुतिन का भारत आगमन – एयरपोर्ट पर PM मोदी की अगवानी ने बढ़ाई यात्रा की अहमियत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब नई दिल्ली पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से इतर जाकर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। यह एक बड़ा संकेत है कि भारत इस यात्रा को कितनी प्राथमिकता देता है।
एयरपोर्ट पर मोदी-पुतिन की गर्मजोशी भरी झप्पी ने स्पष्ट कर दिया कि रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों देशों की नेतृत्व-स्तर की व्यक्तिगत दोस्ती पर भी आधारित हैं।
ऐसी डिप्लोमैटिक बॉडी लैंग्वेज दुनिया को संदेश देती है कि “India–Russia relations are strong, stable and future-oriented.”
⭐ 2. दो-दिवसीय दौरा क्यों खास है?
पुतिन का भारत दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- वैश्विक तनावों के बीच भारत की भूमिका बढ़ रही है
- रूस पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से एशिया में नए साझेदार खोज रहा है
- भारत ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा तकनीक और व्यापार विस्तार पर फोकस कर रहा है
- दोनों देश बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World Order) की बात करते हैं
इस दो दिवसीय दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों की योजना है, जिनमें शीर्षस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता सबसे अहम मानी जा रही है।
⭐ 3. रणनीतिक सहयोग – रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत
भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोगी रहे हैं। भारतीय सेना के कई अहम हथियार, मिसाइल सिस्टम और युद्धक उपकरण रूस की तकनीक पर आधारित हैं।
यह दौरा इन बिंदुओं पर फोकस करेगा:
✔️ S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई अपडेट
भारत की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करने वाले S-400 की डिलीवरी पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी।
✔️ संयुक्त रक्षा उत्पादन (Joint Defence Manufacturing)
‘Make in India’ के तहत रूस के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ाया जाएगा।
✔️ नई तकनीक पर बातचीत
ड्रोन सिस्टम, हाई-टेक सैन्य उपकरण और साइबर सुरक्षा सहयोग भी एजेंडा का हिस्सा हैं।
रूस हमेशा से भारत का विश्वसनीय रक्षा साझेदार रहा है, और यह यात्रा भविष्य के सैन्य सहयोग का नया खाका तैयार कर सकती है।
⭐ 4. ऊर्जा सेक्टर: भारत की जरूरत, रूस का भरोसेमंद विकल्प
भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में रूस की भूमिका बहुत बड़ी है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने एशिया की ओर रुख किया, और भारत उसके लिए सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा।
इस यात्रा में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होगी:
- सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई
- लंबी अवधि का ऊर्जा समझौता
- गैस पाइपलाइन सहयोग
- न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर अपडेट
भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
⭐ 5. व्यापार और निवेश: लक्ष्य 100 बिलियन डॉलर
भारत-रूस व्यापार 2023–24 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। अब दोनों देश इसे और आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
आगामी वर्षों में व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
इसमें शामिल होंगे:
- कच्चा तेल
- कोयला
- खाद
- रक्षा उपकरण
- फार्मा प्रोडक्ट्स
- मशीनरी
- IT सेवाएँ
यह यात्रा नई व्यापारिक राहें खोलेगी, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
⭐ 6. भू-राजनीतिक समीकरण – वैश्विक परिदृश्य में भारत-रूस की भूमिका
आज दुनिया कई खेमों में बंटती दिख रही है। अमेरिका-चीन तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध — इन सबके बीच भारत एक संतुलित भूमिका निभा रहा है।
भारत रूस का पुराना दोस्त है, वहीं अमेरिका, जापान और यूरोप के साथ भी मजबूत संबंध रखता है।
यह “मल्टी-अलाइनमेंट पॉलिसी” भारत के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
पुतिन का दौरा इससे जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा को और गहरा करेगा:
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन
- ब्रिक्स विस्तार
- यूक्रेन संकट पर भारत की शांतिपूर्ण समाधान की नीति
- वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करना
यह यात्रा दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत वैश्विक नीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
⭐ 7. लोगों से लोगों का रिश्ता (People-to-People Connect)
भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ राजनीति या सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं हैं। सांस्कृतिक, शैक्षणिक और पर्यटन क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच मजबूत जुड़ाव है।
- रूस में हजारों भारतीय छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं
- बॉलीवुड फिल्में रूस में लोकप्रिय हैं
- भारतीय पर्यटक रूस का रुख कर रहे हैं
- दोनों देशों के बीच वीज़ा प्रक्रिया को आसान बनाने पर चर्चा होगी
यह ‘मानवीय रिश्तों’ को और मजबूत करेगा।
⭐ 8. पुतिन के दौरे से क्या उम्मीदें?
भारत को इस दौरे से कई रणनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है:
- रक्षा क्षमता में वृद्धि
- सस्ती ऊर्जा की गारंटी
- व्यापार में नई तेजी
- तकनीकी साझेदारी
- वैश्विक मंचों पर रूस का समर्थन
वहीं रूस के लिए भी यह दौरा बेहद अहम है — भारत एक विश्वसनीय साझेदार है और एशियाई स्थिर बाजार प्रदान करता है।
⭐ निष्कर्ष: मोदी-पुतिन मुलाकात से मजबूत होगा भविष्य का Indo-Russia Partnership
पुतिन का भारत दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक है। बदलती दुनिया में भारत और रूस दोनों एक-दूसरे को सिर्फ मित्र नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखते हैं।
दोनों नेताओं की मुलाकात आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, और वैश्विक राजनीति — हर क्षेत्र में यह साझेदारी नई ऊंचाइयाँ छूने को तैयार है।

