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कांग्रेस नेता बिमोल अकोइजम का हमला: कहा—सरकार पहले हर नागरिक की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करे, न कि जनता का विश्वास खो चुकी सत्ता को बचाने में लगी रहे

देश में इन दिनों मणिपुर की स्थिति और वहां की राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी यह होनी चाहिए कि सभी लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए, न कि एक ऐसी सरकार को सत्ता में बनाए रखना या आगे बढ़ाना, जिसे जनता का पूर्ण जनादेश हासिल नहीं है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर-पूर्व में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है और विपक्ष केंद्र पर सवालों की बौछार कर रहा है। आइए इस पूरे मुद्दे को सरल और मानव-सुलभ भाषा में विस्तार से समझते हैं।

कौन हैं बिमोल अकोइजम?

बिमोल अकोइजम मणिपुर से कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं। वे काफी समय से राज्य में बहाल किए जाने वाले शांति, कानून-व्यवस्था और विस्थापित लोगों की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाते आ रहे हैं। वे अकसर सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाते हैं, खासकर तब जब जनता का हित दांव पर लगा हो।

अकोइजम का मुख्य बयान — “सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा है”

सांसद ने कहा कि अभी सबसे ज़रूरी है कि केंद्र सरकार उन सभी लोगों को सुरक्षित घर-परिवार तक वापस पहुंचाने की व्यवस्था करे, जो हिंसा या तनावपूर्ण स्थितियों के कारण अपने घरों से दूर हैं।

उनका इशारा साफ तौर पर मणिपुर में पिछले महीनों में हुई अशांति की ओर था, जिसमें हजारों लोग प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे।

वे कहते हैं कि—
जब तक आखिरी व्यक्ति भी सुरक्षित वापस नहीं आ जाता, तब तक किसी भी राजनीतिक कदम पर विचार करना जनता के भरोसे के खिलाफ है।”

लॉस्ट-मैंडेट’ सरकार क्या है?

बिमोल अकोइजम ने अपने बयान में “लॉस्ट मैंडेट” शब्द का उपयोग किया। इसका अर्थ है—
एक ऐसी सरकार जो जनता के स्पष्ट जनादेश को खो चुकी है, यानी उसके पास सार्वजनिक समर्थन कमजोर है और उसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष का दावा है कि ऐसी सरकार को आगे धकेलना या उसे किसी भी तरह से बचाना जनता की लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।

मणिपुर की स्थिति को लेकर चिंता क्यों बढ़ रही है?

मणिपुर पिछले एक साल से सामाजिक और जातीय हिंसा की चपेट में रहा है। कई लोग घरों से विस्थापित हुए, कई ने अपनी आजीविका गंवाई और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस सांसद का बयान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

मुख्य चिंताएँ:

ऐसी परिस्थितियों में विपक्ष का मानना है कि सरकार को पहले जनजीवन को पटरी पर लाने पर फोकस करना चाहिए।

अकोइजम के बयान का राजनीतिक असर

सांसद के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे केंद्र की नीतियों और कार्यशैली की विफलता के रूप में देख रहा है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार:

जनता की राय: लोग क्या चाहते हैं?

साधारण जनता की दृष्टि से देखें तो लोग चाहते हैं—

राजनीति चाहे कुछ भी कहे, जनता की प्राथमिकता हमेशा बुनियादी जरूरतें और एक सुरक्षित माहौल होता है। यही बात बिमोल अकोइजम ने भी रेखांकित की है।

क्या सरकार इस मुद्दे पर कदम उठाएगी?

केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि स्थिति नियंत्रण में है और पुनर्वास कार्य जारी है। लेकिन विपक्ष मानता है कि और तेज और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

अकोइजम का बयान सरकार पर दबाव बढ़ाने वाला है। अगर सरकार विस्थापित आबादी की सुरक्षित वापसी और राहत कार्यों को प्राथमिकता देती है, तो इससे जनता का भरोसा बढ़ सकता है।

निष्कर्ष — जनता की सुरक्षा राजनीति से बड़ी

बिमोल अकोइजम का संदेश सरल लेकिन गहरा है—
राजनीति बाद में, जनता पहले।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी राजनीतिक गणित से ऊपर उठकर उन सभी नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे, जो अभी भी अनिश्चितता या भय में जी रहे हैं।

उनका यह बयान लोकतंत्र की मूल भावना को दोहराता है—
जनता के बिना सत्ता का कोई अर्थ नहीं।

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